Demand for industry organizations – separate NBFCs to provide loans to MSMEs | उद्योग संगठनों की मांग- एमएसएमई को कर्ज मुहैया कराने के लिए अलग एनबीएफसी बने

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  • कहा -इससे मिले लोन को प्रायोरिटी सेक्टर लेडिंग की श्रेणी में रखा जाए
  • देश में 633.8 लाख एमएसएमई, देश की जीडीपी में करीब 28% योगदान

Dainik Bhaskar

Jan 16, 2020, 11:37 AM IST

नई दिल्ली. छोटे और मध्यम कारोबार (एमएसएमई) देश की जीडीपी में करीब 28% योगदान देते हैं। इनमें 11.1 करोड़ लोगों को रोजगार मिला हुआ है। साथ ही देश के मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट में करीब 45% और निर्यात में 40% से अधिक हिस्सेदारी है। लेकिन फिलहाल यह मांग में सुस्ती और कर्ज न मिल पाने से नकदी के संकट के दौर से गुजर रहे हैं। छोटे उद्योगों के संगठनों ने एक फरवरी को आम बजट पेश होने से पहले सरकार को अपनी सिफारिशें दी हैं। उद्योग संगठनों ने एमएसएमई को कर्ज मुहैया कराने के लिए एक अलग एनबीएसफसी बनाने की मांग की है। साथ ही अनुरोध किया है कि इसके जरिए बांटे जाने वाले कर्ज प्राथमिकता वाले कर्ज की श्रेणी में रखे जाएं।

पेशेवर सेवाओं पर जीएसटी की दर 18% से घटाकर 5% हो
1. एसएमई द्वारा ली जाने वाली पेशेवर सेवाओं पर जीएसटी की दर 5% की जाए अभी यह 18% है।
2. एसएमई में बैंकों का एनपीए 70,000 करोड़ रुपए है। इसे 2022 तक नियमित लोन माना जाना चाहिए।
3. बैंकों द्वारा एसएमई से वसूले जाने वाले सभी तरह के सर्विस चार्ज पूरी तरह माफ होने चाहिए।
4. जब एक एसएमई दूसरे एसएमई से कारोबार करे तो सर्विस चार्ज 5% ही होना चाहिए, अभी 12% है।
5. सेक्टर में काम करने वाले लोगों के लिए एक अलग पेंशन फंड बनाया जाना चाहिए।

आयकर में कटौती का फायदा एमएसएमई को भी मिले: एसोचैम
उद्योग संगठन एसोचैम के प्रेसिडेंट निरंजन हीरानंदानी ने कहा, कंपनियों के लिए आयकर की दरों में जो कटौती की घोषणा की है, इसका फायदा प्रोपराइटरी या पार्टनरशिप फर्म के तौर पर रजिस्टर्ड एमएसएमई को भी मिलना चाहिए। यह क्षेत्र बड़ी मात्रा में रोजगार पैदा करता है इसलिए इसे वित्तीय लाभ के अलावा रोजगार सृजन पर टैक्स में छूट दी जानी चाहिए। पिछले बजट में कैपिटल गेन से स्टार्टअप में निवेश करने पर आयकर छूट दी गई थी। कैपिटल गेन से एमएसएमई में निवेश करने पर भी आयकर मिले।

कोलेटरल-फ्री लोन की सीमा बढ़ाई जाए: एसएमईसीआई
एमएसई चेंबर्स ऑफ इंडिया (एसएमईसीआई) के प्रेसिडेंट चंद्रकांत सालुंखे ने कहा, एसएमई सेक्टर के लिए बैंकों द्वारा दिए जाने वाले कोलेटरल-फ्री लोन की सीमा दो करोड़ रु. है। सूक्ष्म इकाइयों के लिए इसे बढ़ाकर 5 करोड़ रु., लघु उद्यम के लिए 15 करोड़ रु. और मध्यम आकार के उद्यम के लिए 25 करोड़ रु. किया जाना चाहिए। एसएमई के शेयरों में खरीद-फरोख्त के लिए 20,000 करोड़ रुपए का एक इन्वेस्टमेंट फंड बनाया जाना चाहिए। इसका फायदा करीब लिस्टेड 500 एसएमई को मिलेगा।



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